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| करुणामूर्ति सदगुरु परमहंस श्री गंगारामदासजी महाराज द्वारा स्थापित '' मानव धर्म प्रसार प्रवर्तन '' के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में यह वेबसाईट के गठन द्वारा उनके वचनामृत एवं उपदेशों को अधिकतम जनता तक पहुँचाने के लिए यह नम्र प्रयास किया गया है. इस प्रयास में कहीं कोई त्रुटी या क्षति रह गई हो तो हम आप के क्षमाप्रार्थी हैं. |
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| पूज्य श्री महाराजजी अपने जीवनकाल में साम्प्रत सामाजिक कुरीतियों, ऊँचनीच, भेदभाव, जीवनशैली, अज्ञान एवं समाज की प्रवर्तमान मत्स्यन्याय वृत्ति से दुखी रहेते थे. इन समस्याओं के निवारण हेतु एवं समाजोद्धार के लिए उन्होंने '' कुछ भी बनने से पहले आप मानव बनो '' इस मंत्र द्वारा समाज को '' मानव धर्म प्रसार '' का एक विशाल दर्शन दिया. उन्होंने मानव बनने ले लिए '' सत्य, न्याय और धर्म '' यह तीन बातें अनिवार्य बतायीं और इसके प्रसार-प्रचार हेतु एक संगठन का प्रारूप सन १९६२ में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन बना जो बाद में '' मानव धर्म प्रसार '' के नाम से जाना जा रहा है. |
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उनके द्वारा प्रवर्तित '' मानव धर्म प्रसार '' के सूत्रों, सत्य, न्याय, धर्म को, और उसकी अनिवार्यता एवं पुनर्स्थापना तथा उसके फलस्वरुप सुंदर समाज निर्माण हेतु यह लघु प्रयास किया गया है.
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| मानव एक जाति और मानवता ही एक धर्म है. |
| सभी धर्म संप्रदाय के संत प्रवर्तको के विचारो का समादर करना. |
| लुप्तप्राय सत्य, न्याय, धर्म की पुनर्स्थापना करना. |
| सामाजिक कुरीतियों, आडम्बरो से संघर्ष एवं निवारण करना. |
| स्थानीय न्याय द्वारा न्याय सुलभ कराना. |
| समाज से अनाचार, दुराचार व भ्रष्टाचार मिटाना. |
| रंगभेद एवं अस्पृश्यता का निवारण. |
| उपदेशो संभाषणों द्वारा जनता को जागरूक करना. |
| गाँव-गाँव तथा मुहल्लों में समितियों के गठन द्वारा उद्देश्यों का क्रियान्वयन. |
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श्री महाराजजी की जय
मानव धर्म प्रसार की जय |
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